WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

Google AI Mode ने OpenAI को दी कड़ी टक्कर — अब लिंक क्लिक करने की ज़रूरत नहीं!

Google AI Mode – तकनीक की दुनिया में हर दिन कुछ न कुछ नया होता रहता है, लेकिन इस बार Google ने जो कदम उठाया है, उसने इंटरनेट की तस्वीर ही बदल दी है। जी हां, हम बात कर रहे हैं Google के नए AI Mode की, जो अब OpenAI जैसे दिग्गजों को सीधी टक्कर दे रहा है। पहले जहां यूजर को किसी भी सवाल का जवाब पाने के लिए लिंक पर क्लिक कर के अलग-अलग वेबसाइट्स पर जाना पड़ता था, अब वही जवाब एक ही जगह, बिना क्लिक के, मिल रहा है।

आपने देखा होगा कि जब आप Google पर कुछ सर्च करते हैं तो आपको ऊपर कुछ snippets मिलते हैं, लेकिन अब ये snippets और भी ज्यादा स्मार्ट हो गए हैं। अब Google का AI Mode आपके सवाल को समझ कर बिल्कुल सटीक और विस्तार से जवाब देता है। मतलब अब आपको लिंक खोल कर पूरा आर्टिकल पढ़ने की जरूरत नहीं है। यही बात OpenAI को सीधी चुनौती देती है क्योंकि ChatGPT जैसे मॉडल्स भी यही करते हैं — आपके सवाल का जवाब तुरंत देते हैं।

अब सवाल उठता है कि Google को ऐसा करने की जरूरत क्यों पड़ी? दरअसल, OpenAI ने जब GPT-4 और इसके बाद के वर्जन लॉन्च किए, तो लोगों को ChatGPT की आदत सी पड़ गई। लोग सीधे ChatGPT से सवाल पूछने लगे और Google पर सर्च करने वालों की संख्या में थोड़ी गिरावट देखी गई। Google को अपनी बादशाहत बनाए रखने के लिए कुछ नया करना ही था, और तभी उसने अपने सर्च इंजन को AI Mode से लैस कर दिया।

Google का ये कदम सिर्फ एक अपडेट नहीं है, बल्कि एक बड़ी क्रांति है। इससे सर्च इंजन की दुनिया में एक नया युग शुरू हो गया है। अब यूजर का समय बचेगा, जवाब भी बेहतर मिलेगा और जानकारी भी ज्यादा सटीक होगी। लेकिन इसका दूसरा पहलू ये भी है कि वेबसाइट ओनर्स और ब्लॉगर अब चिंता में हैं कि कहीं उनकी साइट्स पर ट्रैफिक तो नहीं घट जाएगा।

सोचिए, अगर आपको हर जानकारी सीधा Google के पेज पर मिल जाए तो आप किसी वेबसाइट पर क्यों जाएंगे? यही सवाल आज हजारों डिजिटल मार्केटर्स, ब्लॉगर्स और SEO एक्सपर्ट्स को परेशान कर रहा है।

लेकिन टेक्नोलॉजी का मतलब ही बदलाव है। जो आज है, वो कल बदल जाएगा। इसलिए जरूरी ये है कि हम इस बदलाव को समझें और खुद को इसके हिसाब से ढालें। आगे के सेक्शन्स में हम जानेंगे कि ये AI Mode कैसे काम करता है, इसके फायदे-नुकसान क्या हैं और OpenAI को इससे कितनी टक्कर मिलने वाली है।

Google AI Mode क्या है?

Google AI Mode
Google AI Mode

 

सीधे शब्दों में कहें तो Google AI Mode, Google सर्च इंजन का वो स्मार्ट अपग्रेड है जो आपकी हर क्वेरी को एक इंसान की तरह समझ कर जवाब देता है। पहले जब आप कुछ सर्च करते थे, तो Google सिर्फ लिंक दिखाता था। आपको उन पर क्लिक करके कंटेंट पढ़ना पड़ता था। अब AI Mode उस पूरे कंटेंट को पढ़ कर, उसका सार निकाल कर, आपके सामने पेश करता है — वो भी आपके सवाल के हिसाब से कस्टमाइज करके।

माना कि snippets पहले भी थे, लेकिन ये snippets सिर्फ कंटेंट के कुछ हिस्से दिखाते थे। नए AI Mode में पूरा जवाब एक human-like conversation की तरह होता है। जैसे आप किसी दोस्त से सवाल पूछते हैं और वो विस्तार से समझाता है, वैसा ही अनुभव अब Google पर मिलने लगा है।

इसका मतलब ये हुआ कि अब आपको छोटे-छोटे सवालों के लिए अलग-अलग वेबसाइट्स पर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। आप जो पूछेंगे, जवाब आपको वही मिलेगा — बिना भटकाव के। ये फीचर अभी कुछ ही यूजर्स को टेस्टिंग मोड में मिला है, लेकिन जल्द ही ये पूरी दुनिया में रोलआउट होगा।

Google ने इसे इतने स्मार्ट तरीके से डिजाइन किया है कि ये आपकी query को context के साथ समझता है। मतलब अगर आप follow-up सवाल पूछेंगे तो वो भी समझ जाएगा कि आप किस बारे में बात कर रहे हैं। ये वही चीज है जो ChatGPT को खास बनाती है — और अब Google ने इसे अपनी सर्च में शामिल कर लिया है।

तो सोचिए, क्या आप बार-बार लिंक पर क्लिक करेंगे? शायद नहीं! यही वजह है कि OpenAI को अब Google से कड़ी टक्कर मिल रही है। लेकिन ये भी सच है कि AI Mode के आने से यूजर्स को काफी फायदा होगा। सबकुछ एक जगह और वो भी मिनटों में!

इसे भी पढ़ें : AI Se YouTube Video Kaise Banaye – New YouTubers के लिए 2025 का Best तरीका!

OpenAI के मुकाबले Google का नया कदम

अब बात करते हैं असली मुकाबले की। OpenAI यानी वो कंपनी जिसने ChatGPT और GPT सीरीज से दुनिया को AI चैटबॉट्स से रूबरू करवाया। OpenAI का मॉडल इतना पावरफुल है कि लाखों लोग ChatGPT का इस्तेमाल अपने सवालों के जवाब पाने के लिए करते हैं। लेकिन अब Google ने अपनी किंगडम बचाने के लिए उसी हथियार को अपनी सर्च में जोड़ दिया है।

पहले जहां लोग OpenAI के चैटबॉट पर जाते थे, अब वही काम Google पर हो जाएगा। फर्क बस इतना है कि OpenAI एक अलग प्लेटफॉर्म है जबकि Google आपके रोज़ाना के सर्च एक्सपीरियंस का हिस्सा है।

यहां Google को एक एडवांटेज ये भी है कि उसके पास पूरी दुनिया का सबसे बड़ा डेटा बेस है। वो आपकी सर्च हिस्ट्री, इंटरेस्ट्स और बिहेवियर को पहले से जानता है। ऐसे में जब वो AI Mode में जवाब देगा तो वो और भी ज्यादा पर्सनलाइज्ड होगा। ये वही चीज है जो ChatGPT को भी अभी तक पूरी तरह हासिल नहीं हो पाई है।

मतलब साफ है — अब यूजर के पास दो ऑप्शन हैं: या तो वो OpenAI के चैटबॉट पर जाएं या फिर उसी सर्च इंजन पर सबकुछ पा लें जिसे वो सालों से इस्तेमाल कर रहे हैं।

इससे OpenAI को न सिर्फ एक बड़ा कॉम्पिटिटर मिला है बल्कि अब उसे अपने मॉडल को और एडवांस बनाना होगा ताकि वो Google से आगे रह सके।

Google का ये कदम साबित करता है कि टेक्नोलॉजी में कुछ भी स्थायी नहीं होता। जो आज लीडर है, वो कल पिछड़ सकता है। इसलिए OpenAI के लिए ये वक्त है खुद को रीइन्वेंट करने का। वरना आने वाले वक्त में लोग पूछेंगे — “ChatGPT? वो क्या था?”

इसे भी पढ़ें : Meta AI से पैसे कैसे कमाएं – जानिए 2025 के 7 सबसे आसान और नए तरीके!

कैसे काम करता है Google AI Mode?

अब थोड़ा टेक्निकल हो जाएं। आखिर Google का AI Mode काम कैसे करता है? क्या ये सच में इतना स्मार्ट है कि लिंक पर क्लिक करने की जरूरत ही नहीं? जवाब है — हां, और इसके पीछे है Google की एडवांस्ड मशीन लर्निंग और नैचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी।

AI Mode आपकी क्वेरी को सिर्फ शब्दों के तौर पर नहीं देखता बल्कि उसके पीछे की मंशा भी समझता है। इसे Intent Understanding कहते हैं। मान लीजिए आपने पूछा — “सबसे अच्छा स्मार्टफोन कौन सा है?” तो Google सिर्फ लिस्ट नहीं देगा, बल्कि आपके बजट, ट्रेंड्स और यूजर रिव्यू को भी देख कर एक कस्टमाइज्ड जवाब तैयार करेगा।

AI Mode के अंदर BERT और MUM जैसे मॉडल्स को इंटीग्रेट किया गया है। ये मॉडल्स Google के पुराने सर्च अल्गोरिदम से कई गुना ज्यादा पावरफुल हैं। ये आपके सवाल का context समझते हैं, synonyms पकड़ते हैं और multi-turn conversation भी कर सकते हैं।

मतलब अगर आप follow-up question पूछेंगे जैसे “और क्या ऑप्शन है?” तो AI Mode तुरंत पहले सवाल से जोड़ कर नया जवाब देगा। यही वजह है कि लिंक पर क्लिक करने की जरूरत नहीं पड़ती।

इसे भी पढ़ें : Uber से पैसे कैसे कमाएं: 7 Best Uber Business Idea

OpenAI VS Google AI Mode

अब जरा इस मुकाबले की असली पिक्चर देख लेते हैं। एक तरफ OpenAI है, जिसने GPT-3, GPT-4 और इसके बाद के वर्जन्स से दुनिया भर के यूजर्स को AI चैटबॉट्स का स्वाद चखाया। दूसरी तरफ Google है, जो दुनिया का सबसे बड़ा सर्च इंजन है और अब वही OpenAI की टेक्नोलॉजी को अपनी सर्च में घोल रहा है।

पहले OpenAI का बड़ा USP था कि वो इंसानों जैसा बातचीत का अनुभव देता है। यूजर को लिंक नहीं खोजना पड़ता, वो सवाल पूछते हैं और तुरंत जवाब पाते हैं। यही वजह थी कि करोड़ों लोग ChatGPT के एडिक्ट हो गए थे। अब Google ने उसी USP को अपनी सर्च में डाल दिया। फर्क ये है कि Google के पास डेटा का महासागर है — सालों की सर्च हिस्ट्री, billions of indexed pages और यूजर बिहेवियर का अनमोल खजाना।

OpenAI ने GPT के वर्जन्स को ट्रेन करने के लिए बहुत बड़ा कॉर्पस इस्तेमाल किया, लेकिन Google के पास इससे कहीं ज्यादा लाइव और अपडेटेड डेटा है। इसका मतलब है कि Google के AI Mode के जवाब ज्यादा updated रहेंगे जबकि ChatGPT अभी भी ज्यादातर प्री-ट्रेंड डेटा पर चलता है। हां, OpenAI ने भी वेब ब्राउजिंग फीचर निकाला है, लेकिन उसका स्कोप अभी भी लिमिटेड है।

इस मुकाबले में एक चीज OpenAI के पक्ष में है — उसका conversational style ज्यादा human-like है। ChatGPT के जवाब natural flow में आते हैं, whereas Google का AI Mode अभी भी snippets और summaries पर फोकस करता है। लेकिन जिस रफ्तार से Google innovation कर रहा है, वो दिन दूर नहीं जब दोनों का फर्क भी खत्म हो जाएगा।

तो कह सकते हैं कि यह जंग सिर्फ टेक्नोलॉजी की नहीं बल्कि डेटा, यूजर बिहेवियर और convenience की भी है। यूजर को जहां कम steps में सही जवाब मिलेगा, वो वहीं जाएगा। इसलिए OpenAI को अब कुछ नया करना पड़ेगा — जैसे ज्यादा पर्सनलाइजेशन, updated web browsing या नए फीचर्स — ताकि वो Google से दो कदम आगे रह सके।

इसे भी पढ़ें : AI से अपनी Dream Book लिखें – Author बनने का सबसे आसान तरीका, Ai Se Book Kaise Banaye

Google का Gemini और अन्य AI Model

OpenAI की GPT सीरीज के मुकाबले Google के पास भी कई एडवांस्ड AI मॉडल हैं। हाल ही में Google ने अपना Gemini AI Model लॉन्च किया है, जो BERT और MUM जैसे पुराने मॉडल्स से कहीं ज्यादा पावरफुल है। यह मॉडल Multimodal capabilities के लिए जाना जाता है यानी टेक्स्ट के साथ-साथ इमेज, वीडियो और ऑडियो को भी समझ सकता है।

Gemini को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह Google के बाकी प्रोडक्ट्स से seamlessly integrate हो सके। मतलब Gmail, Docs, Sheets, YouTube — हर जगह यह AI आपकी मदद कर सकता है। यही तो Google की सबसे बड़ी ताकत है — उसका पूरा Ecosystem!

अगर आप Google पर कुछ सर्च करते हैं और उसी को लेकर Gmail में ईमेल ड्राफ्ट करना चाहते हैं, तो वही AI आपकी मदद करेगा। यही synergy OpenAI के पास नहीं है क्योंकि वो एक standalone चैटबॉट है।

Google का फोकस सिर्फ सर्च इंजन तक सीमित नहीं है। वो AI को अपने पूरे प्रोडक्ट सूट में फैला रहा है। इसका मतलब है कि आने वाले सालों में हम हर Google प्रोडक्ट में किसी न किसी रूप में AI देखेंगे। यही OpenAI के लिए सबसे बड़ा खतरा है — क्योंकि अब मुकाबला सिर्फ सवाल-जवाब का नहीं बल्कि पूरे यूजर वर्कफ्लो का है।

इसे भी पढ़ें : ChatGPT से पैसे कैसे कमाएं:15 बेस्ट तरीके

क्या यह यूजर के लिए बेहतर है?

अब सवाल ये है कि क्या ये बदलाव वाकई हर यूजर के लिए बेहतर है? देखिए, अगर आप एक normal यूजर हैं जिसे सिर्फ जानकारी चाहिए, वो भी जल्दी — तो ये फीचर बेहतरीन है। आपके लिए Zero Click Search Time Saver की तरह काम करता है। आप travel plans बनाएं, Cooking Recipes खोजें या किसी टेक्निकल टॉपिक की basic समझ लें — सबकुछ एक जगह मिल जाता है।

लेकिन अगर आप Researcher हैं, या किसी niche टॉपिक पर in-depth Analysis चाहते हैं, तो आपको AI Mode के जवाब अधूरे भी लग सकते हैं। Reason? AI Mode summaries और snippets पर फोकस करता है, और deep dive content के लिए आपको फिर भी Original Source खोलना ही पड़ेगा।

तो इसे यूजर के हिसाब से मिला-जुला अनुभव कहा जा सकता है। Convenience तो है, पर Depth कम है। लेकिन यही तो Google का मकसद है — वो Majority यूजर्स को देखता है, जो Detailed Researcher नहीं हैं, बल्कि Quick Fix चाहते हैं।

इसके अलावा Voice Search और Multimodal Search का ट्रेंड भी AI Mode से जुड़ गया है। अब आप सवाल बोल कर पूछ सकते हैं, इमेज सर्च कर सकते हैं और उसी पर AI Generated Explanation पा सकते हैं। जैसे Google Lens में आप किसी प्लांट की फोटो क्लिक करते हैं तो AI Mode उसके बारे में डीटेल में बता देगा — कहाँ पाया जाता है, कैसे उगाएं, उसके फायदे क्या हैं, सब कुछ।

लेकिन हर सिक्के के दो पहलू होते हैं। यूजर के लिए AI Mode तो शानदार है, मगर वेबसाइट ओनर्स और कंटेंट क्रिएटर्स के लिए ये नई टेंशन भी है।

इसे भी पढ़ें : राधिका सुब्रमणियम: भारत की पहली AI ट्रैवलर इन्फ्लुएंसर

AI Mode के फायदे

अब तक हमने देखा कि Google के नए AI Mode से यूजर एक्सपीरियंस बदल रहा है, वेबसाइट ओनर्स की चिंता बढ़ रही है, और SEO इंडस्ट्री भी नई दिशा पकड़ रही है। पर हर नई टेक्नोलॉजी की तरह AI Mode के भी अपने कई फायदे हैं, जो इसे इतना पॉपुलर बना रहे हैं।

सबसे बड़ा फायदा है समय की बचत। पहले कोई भी सवाल सर्च करने पर यूजर को 5-10 वेबसाइट्स खोलनी पड़ती थीं, सही जवाब ढूंढने में टाइम लगता था, और फिर भी कई बार जवाब अधूरा रह जाता था। अब AI Mode मिनटों में नहीं बल्कि सेकेंडों में वो सब जानकारी एक ही पेज पर दे देता है। चाहे आप ‘दुनिया की सबसे ऊंची बिल्डिंग’ पूछें या ‘फाइनेंशियल प्लानिंग कैसे करें’, आपको structured, concise और relevant जवाब तुरंत मिल जाता है।

दूसरा बड़ा फायदा है रियल टाइम अपडेटेड कंटेंट। OpenAI का GPT कई बार पुराने डेटा पर निर्भर होता है, जबकि Google AI Mode लाइव वेब को पढ़कर आपको सबसे नया जवाब देता है। Imagine करिए आप IPL का स्कोर पूछ रहे हैं या किसी breaking news की डीटेल चाहिए — यहाँ Google का AI Mode unbeatable है।

तीसरा फायदा है मल्टी-लिंगुअल सपोर्ट। भारत जैसे देशों में जहाँ यूजर अलग-अलग भाषाओं में सवाल पूछते हैं, वहाँ Google ने Hindi, Tamil, Bengali, Marathi जैसी भाषाओं में भी AI Mode चालू कर दिया है। ये Local Users के लिए Game Changer है, जो पहले अंग्रेज़ी कंटेंट न समझ पाने के कारण सही जानकारी से वंचित रहते थे।

चौथा फायदा है इंटरएक्टिव नेचर। आप follow-up सवाल पूछ सकते हैं, जवाब को customize कर सकते हैं — जैसे ChatGPT के साथ करते हैं, पर यहाँ फायदा ये है कि आपको ChatGPT अलग से ओपन नहीं करना पड़ता। सबकुछ उसी सर्च पेज पर हो जाता है।

पांचवा फायदा है Accessibility। अब बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक आसानी से सवाल पूछ सकते हैं। उन्हें Technical Websites या Confusing Blogs में नहीं भटकना पड़ता। Voice Search भी इसमें बड़ा रोल निभा रहा है। आप बोल कर सवाल पूछिए — जवाब फौरन हाज़िर।

छठा फायदा है Contextual Recommendations। मान लीजिए आप किसी Movie के बारे में पूछते हैं तो AI Mode उससे जुड़ी IMDb Ratings, Cast, और Streaming Platforms भी दिखा सकता है। मतलब आपको बार-बार नए सर्च keywords नहीं डालने पड़ते।

तो कुल मिलाकर देखा जाए तो यूजर के लिए AI Mode एक Virtual Buddy की तरह काम करता है — जो आपकी भाषा समझता है, आपके सवाल की मंशा पकड़ता है, और बिना टाइम खराब किए आपको सबसे सही जवाब देता है।

इसे भी पढ़ें : Paisa Jitne Wala Game 2025, रोज ₹970 कमाओ गेम खेलकर

AI Mode के नुकसान

फायदे तो बहुत हैं, लेकिन हर नई टेक्नोलॉजी की तरह AI Mode के कुछ नुकसान भी हैं, जो नजरअंदाज नहीं किए जा सकते। सबसे बड़ा सवाल है — विश्वसनीयता। AI Mode भले ही रियल टाइम डेटा दिखा रहा हो, लेकिन कई बार ये गलत या Out-of-Context जानकारी भी दे सकता है। Reason? Google की AI भी आखिर इंसानों के बनाए डेटा पर ही ट्रेन होती है, जिसमें Errors या Biases हो सकते हैं।

दूसरा बड़ा नुकसान है Original Websites को ट्रैफिक लॉस। जब यूजर लिंक पर क्लिक ही नहीं करेगा तो Website Owners का Revenue कैसे बनेगा? Ad Impressions घटेंगे, Affiliate Clicks कम होंगे और Organic Leads पर असर पड़ेगा। यही वजह है कि Zero Click Searches को कई Industry Experts ‘Silent Killer’ भी कह रहे हैं।

तीसरा नुकसान है कंटेंट चोरी का डर। कई ब्लॉगर शिकायत कर रहे हैं कि Google उनकी साइट से कंटेंट उठाकर Summaries बना रहा है, लेकिन Proper Credit या Traffic Backflow नहीं मिल रहा। Source Attribution छोटे फॉन्ट में होता है, उस पर क्लिक कौन करेगा? ऐसे में कंटेंट क्रिएटर्स को Sustainable Model खोजना होगा।

चौथा नुकसान है Privacy Concerns। AI Mode आपकी सर्च हिस्ट्री और यूजर बिहेवियर के आधार पर जवाब कस्टमाइज करता है। मतलब आपकी हर Query, हर Click, हर Interest Google के पास Store होता है। क्या ये Ethical है? क्या ये Future में Personal Privacy पर खतरा नहीं बन सकता? ये बहस अब तेज होने लगी है।

पाँचवाँ नुकसान है Dependency। यूजर को Spoon-Feeding की आदत लग जाएगी। लोग खुद से Deep Research करना छोड़ देंगे, Critical Thinking घटेगी। खासकर Students के लिए ये खतरनाक है। उन्हें Quick Answers मिलेंगे लेकिन Concepts की Grasp कमज़ोर होगी।

छठा नुकसान है Ads और Sponsored Bias। अगर Google अपने AI Mode में Sponsored Results को भी मिला दे तो Neutrality खतरे में पड़ जाएगी। Imagine कीजिए, आप किसी Product के Best Option पूछते हैं और AI Mode आपको Sponsorship वाले Products Recommend कर दे!

तो साफ है कि AI Mode जितना Powerful है, उतना ही Double-Edged Sword भी है। फायदा उठाना है तो Limitations को समझना भी जरूरी है।

इसे भी पढ़ें : Meta AI से पैसे कैसे कमाएं – जानिए 2025 के 7 सबसे आसान और नए तरीके!

क्या हम इस पर विश्वास कर सकते है। 

जब भी कोई नई टेक्नोलॉजी यूजर्स को “सबकुछ एक क्लिक में” देने लगे, तो सबसे बड़ा सवाल उठता है, क्या हम इस पर पूरी तरह भरोसा कर सकते हैं? Google का AI Mode अब तक लाखों लोगों को तेजी से जवाब देने में कामयाब रहा है, लेकिन इसने कई बार गलत या आधी-अधूरी जानकारी भी दी है। यही वजह है कि Trust Factor को लेकर बड़ी बहस चल रही है।

सबसे पहले बात करते हैं कंटेंट सोर्स की। OpenAI की GPT टेक्नोलॉजी में भी यही मुद्दा था कि ये पुराने डेटा पर ज्यादा निर्भर रहती थी, लेकिन Google का दावा है कि उसका AI Mode लाइव इंटरनेट को पढ़कर जवाब देता है। फिर भी सवाल वही है, जब वो पूरी जानकारी समरी में बदल देता है तो क्या वो context तोड़-मरोड़ कर पेश नहीं होती? उदाहरण के लिए, अगर आप मेडिकल क्वेरी पूछते हैं, तो AI Mode किसी मेडिकल ब्लॉग या जर्नल से कुछ लाइन्स निकाल कर दिखा देगा। लेकिन क्या वो डायग्नोसिस के लिए सही होगा? बिल्कुल नहीं!

कई यूजर्स ने Reddit और Twitter पर Google के AI Mode के जवाबों में factual errors और biased opinions की शिकायत की है। जैसे किसी complex legal issue या controversial topic पर AI Mode एक तरफा नजरिया भी दिखा सकता है। ये इंसानी सोच से भी ज्यादा खतरनाक है क्योंकि लोग सोचते हैं, “Google कह रहा है, मतलब सही होगा!”

इसका एक बड़ा कारण है, Machine Bias। AI इंसानों के बनाए कंटेंट से सीखता है। उसमें जो bias होगा, वही AI में भी आ सकता है। Google अपने मॉडरेशन सिस्टम से इसे कम करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन यह काम कभी पूरा नहीं होगा क्योंकि इंसानी समाज खुद पूरी तरह bias-free नहीं है।

एक और सवाल है transparency का। AI Mode जवाब कहां से उठा रहा है? कौनसे sources पर ज्यादा भरोसा किया गया? किस साइट को नजरअंदाज कर दिया गया? ये चीज़ें अब तक यूजर को साफ तौर पर नहीं दिखाई जातीं।

इसका दूसरा पहलू है Accountability। अगर AI Mode किसी को गलत जानकारी देकर नुकसान पहुंचा दे तो जिम्मेदारी किसकी होगी? गूगल कहेगा — “हमने तो सिर्फ summarized answer दिया।” कंटेंट क्रिएटर कहेगा — “हमारे ब्लॉग से पूरी लाइन ही गायब कर दी गई।” और यूजर बीच में फंस जाएगा।

इन सब बातों को देखते हुए साफ है कि AI Mode को अभी भी इंसानी नजर से cross-check करना जरूरी है। One Click Answer के चक्कर में blind trust करना कभी भी गलत साबित हो सकता है — खासकर हेल्थ, फाइनेंस या लीगल मामलों में।

गलत जानकारी का खतरा

अब जरा इस खतरे को और गहराई से समझें। Imagine कीजिए — एक स्टूडेंट अपनी परीक्षा की तैयारी कर रहा है और उसे किसी इतिहास के सवाल का जवाब चाहिए। उसने गूगल के AI Mode से पूछा और जवाब आ गया — लेकिन वो जवाब आधा सही और आधा गलत है। अगर वो स्टूडेंट उस पर आंख मूंदकर भरोसा कर ले तो उसका नुकसान कौन भरेगा?

AI Mode में hallucination का खतरा हमेशा रहेगा। Large Language Models अपने confidence में कभी-कभी ऐसा जवाब भी दे देते हैं जो 100% गलत होता है लेकिन पढ़ने में इतना authentic लगता है कि यूजर confuse हो जाता है। ChatGPT की तरह Google के AI Mode में भी ये खतरा है। फर्क बस इतना है कि ChatGPT पर लोग थोड़ा शक करते हैं क्योंकि वो चैटबॉट है, लेकिन Google Search पर लोग दशकों से भरोसा करते आए हैं , यही blind trust सबसे बड़ा खतरा है।

मिसइनफॉर्मेशन और फेक न्यूज का खतरा भी इसी वजह से बढ़ सकता है। Imagine करिए किसी पॉलिटिकल मुद्दे पर AI Mode ने किसी पुराने आर्टिकल को संदर्भ से काटकर दिखा दिया। लाखों लोग उस snippet को पढ़ कर misinformation फैला सकते हैं।

Google कोशिश कर रहा है कि वो ‘Source Link’ और ‘Learn More’ जैसा ऑप्शन हर AI जवाब के साथ दे, ताकि यूजर Original Context देख सके। लेकिन सवाल वही है , क्या आजकल के impatient यूजर ऐसा करेंगे?

जाहिर है, AI Mode का इस्तेमाल करते वक्त blind faith से बेहतर है कि आप दोबारा Cross-Check करें, खासकर Sensetive Topics पर। Schools और Colleges को भी चाहिए कि वो बच्चों को AI Generated Content के ethical और practical limitations के बारे में awareness दें, वरना गलत जानकारी के जाल में फंसना आसान है।

प्राइवेसी और डेटा सिक्योरिटी

अब आते हैं एक ऐसे पहलू पर जो कई लोगों को अभी भी नहीं पता – डेटा सिक्योरिटी। Google का AI Mode जितना पर्सनलाइज्ड है, उतना ही ये आपके हर सवाल, हर क्लिक और हर इंटरेस्ट को ट्रैक भी करता है।

मान लीजिए आप रोज़मर्रा की हेल्थ रिपोर्ट्स, फाइनेंशियल स्टेटस, बच्चों की एजुकेशन प्लानिंग – सब AI Mode से पूछ रहे हैं। अब Google के पास आपका पूरा Digital Blueprint बन रहा है। यूजर को लगता है – “ये तो सिर्फ सवाल-जवाब है!” लेकिन हर सवाल आपका Behavioural Pattern बता रहा है।

Google पहले से ही दुनिया का सबसे बड़ा डेटा कलेक्टर है। AI Mode इस डेटा का और गहराई से इस्तेमाल करता है ताकि जवाब ज्यादा पर्सनलाइज्ड दिखें। लेकिन यही डेटा Ad Targeting में भी यूज हो सकता है। सोचिए, आप किसी बीमारी के बारे में पूछते हैं और कुछ दिन बाद आपकी Gmail या YouTube पर उसी बीमारी से जुड़ा Ad दिखने लगता है!

GDPR जैसी डेटा प्रोटेक्शन पॉलिसी यूरोप में काफी सख्त हैं, लेकिन भारत जैसे देशों में अभी यूजर प्राइवेसी को लेकर न तो इतनी समझ है और न ही कानून इतने पक्के हैं। इस वजह से AI Mode की पर्सनलाइजेशन पावर आपका फायदा भी है और खतरा भी।

Google कहता है कि आपकी क्वेरीज को अनॉनिमस किया जाता है, लेकिन Experts मानते हैं कि आजकल Anonymization भी उतना कारगर नहीं रह गया है। AI की मदद से Patterns को Re-Identify किया जा सकता है।

तो अगर आप AI Mode यूज कर रहे हैं तो ध्यान रखें कि आपकी हर Query एक Digital Footprint छोड़ रही है। Sensetive Information को ऑनलाइन शेयर करते वक्त दो बार सोचिए, वरना Convenience के चक्कर में आपकी प्राइवेसी का भट्ठा बैठ सकता है।

क्या Google का AI Mode भरोसेमंद है?

अब बात करते हैं सबसे अहम सवाल की — क्या Google का AI Mode इतना भरोसेमंद है कि आप उस पर आंख मूंदकर विश्वास कर सकें? टेक्नोलॉजी की दुनिया में भरोसे का मतलब है Accuracy, Fairness और Transparency। इन तीनों कसौटियों पर AI Mode फिलहाल मिश्रित नंबर ही हासिल कर पा रहा है।

जैसा कि पहले बताया, Google का AI Mode लाखों Sources से डेटा खंगालता है और उसे Summarize कर देता है। इसका मतलब है कि जानकारी अक्सर up-to-date होती है। Sports Scores, Live Events या Breaking News के लिए यह शानदार है। लेकिन Complex Topics जैसे Legal, Medical या Opinion-Based Queries में अब भी यह कमज़ोर पड़ जाता है।

इंटरनेट पर कई केस सामने आए हैं जहां AI Mode ने Outdated या Biased डेटा के आधार पर गलत जवाब थमा दिए। उदाहरण के लिए, Reddit पर एक यूजर ने बताया कि उसने अपनी Diabetes Treatment से जुड़ा सवाल Google के AI Mode में पूछा तो उसे एक ऐसा Remedy बताया गया जिसे FDA ने सालों पहले खारिज कर दिया था!

ऐसे में सवाल उठता है – क्या Google Users को Enough Clarity देता है कि ये Answer AI Generated है? हां, Google AI Overview के साथ Small Note जोड़ता है कि यह ऑटो-जेनरेटेड है और इसमें लिंक दिए जाते हैं। लेकिन Mass Audience उन लिंक पर कितना क्लिक करती है — ये तो आप जानते ही हैं!

भरोसे का दूसरा पहलू है – Bias और Manipulation। जब कोई Algorithm Trending Topics पर खुद से Summaries बनाने लगे तो उसमें Bias घुसना तय है। Political Queries और Controversial Topics में यह खतरा दोगुना हो जाता है। कंपनियां Sponsored Snippets के ज़रिए अपनी बात ऊपर रख सकती हैं। Long-Term में Neutrality Questionable बन जाती है।

तीसरा पहलू है User Feedback और Testing। Google का दावा है कि वह हर Feedback को Use करता है और AI Mode को Constantly Train करता रहता है। आप खुद भी AI Overview पर ‘Was this helpful?’ क्लिक करके उसे Signal भेज सकते हैं। लेकिन ये भी सच है कि Millions of Users के Inputs के बावजूद Absolute Accuracy हासिल करना मुश्किल है – क्योंकि AI भी आखिर इंसानी कंटेंट से ही सीखता है।

इसलिए Experts यही सलाह देते हैं – AI Mode से Instant Answer लो लेकिन Cross-Check करना मत छोड़ो। खासकर Sensitive Queries पर Original Source जरूर पढ़ो। Future में जैसे-जैसे AI Mode और Mature होगा, इसमें Transparency Features भी जुड़ सकते हैं – जैसे कौन सा Source कितना योगदान दे रहा है, या कौन से Bias फिल्टर किए जा रहे हैं।

भारत में AI Mode का प्रभाव

अब बात करते हैं इस सबका India Angle! भारत में तो वैसे ही हर चीज का Mass Adoption कई बार Western Markets से भी ज्यादा तेज होता है — फिर चाहे वो WhatsApp हो या UPI। Google का AI Mode भी यहां बहुत तेजी से Popular हो रहा है, खासकर छोटे शहरों में।

भारत के Millions of Users अभी भी Limited English Knowledge की वजह से Detailed Content नहीं समझ पाते थे। लेकिन अब जब Google Hindi, Marathi, Tamil, Bengali जैसी लोकल भाषाओं में भी AI Mode के जवाब दे रहा है — तो ये Users के लिए Gold Mine है! कोई भी छात्र, किसान, Shopkeeper या Small Business Owner अपने सवालों के जवाब बिना बड़ी-बड़ी रिपोर्ट पढ़े पा सकता है।

यही वजह है कि Search Volume तो तेजी से बढ़ेगा लेकिन Link Clicks में गिरावट भी दिखेगी। Indian Bloggers और Websites Owners के लिए ये Alarm Bell है। Informational Niches पर Ad Revenue अब उतना Strong नहीं रहेगा, क्योंकि यूजर वहीं Google Snippet से जवाब लेकर निकल जाएगा।

वहीं Brands के लिए ये Double-Edged Sword है। Rural India में Zero Click Answers उनका Brand Recall तो बढ़ा सकते हैं लेकिन Last Click Conversion ट्रैक करना मुश्किल होगा। Sponsored Snippets और Voice Search Ads शायद Rural Markets में अच्छा काम करेंगे — बशर्ते Local Language Support मजबूत हो।

कुल मिलाकर देखा जाए तो भारत में AI Mode का असर दो पहलू वाला होगा — एक तरफ Convenience, दूसरी तरफ Content Creators की नई जंग!

Google AI Mode का फ्यूचर में क्या होगा। 

अब सवाल ये है कि ये सिलसिला कहाँ तक जाएगा? क्या अगले 5 साल में Link Clicks का Culture ही खत्म हो जाएगा? Experts मानते हैं कि Informational Queries के लिए हां, पर Transactional और High-Intent Queries के लिए Websites की जरूरत बनी रहेगी। कोई भी User आखिरकार Booking, Shopping, या Paid Services के लिए Original Source पर जाएगा ही।

AI Mode भविष्य में Multimodal Search को और Strong करेगा। Images, Voice और Videos को Context में जोड़कर आपको 360° Answer मिलेगा। Google Gemini और DeepMind जैसे Models इस दिशा में बहुत तेजी से Develop हो रहे हैं।

निष्कर्ष

तो क्या OpenAI हार जाएगा? क्या ChatGPT अब Outdated हो जाएगा? जवाब उतना सीधा नहीं है। ChatGPT अभी भी एक Dedicated Conversational Assistant है, जो Coding, Long-Form Content और Personalized Interaction में Strong है। लेकिन Google AI Mode ने उसके USP को Mass Audience में Popular बना दिया है।

Future उन्हीं Platforms का है जो Real-Time Data, Maximum Accuracy, Privacy Safety और Fair Monetization Ecosystem को Balance कर पाएंगे। जो Bloggers और Marketers इस बदलाव को जल्दी समझ जाएंगे, वही इस AI Revolution में जिंदा रहेंगे — बाकी Zero Click Storm में उड़ जाएंगे।

FAQs

Q1. क्या AI Mode हमेशा फ्री रहेगा?
अभी तो हां, लेकिन भविष्य में Sponsored Snippets या Premium Answers के लिए Paid Models आ सकते हैं।

Q2. क्या Website Owners को AI Mode से खतरा है?
हाँ, खासकर Informational Sites को Zero Click Searches से Organic Traffic Loss का खतरा ज्यादा है।

Q3. क्या SEO इंडस्ट्री खत्म हो जाएगी?
नहीं! SEO अब Content Summaries से ऊपर जाने के लिए Long-Form, Research-Based और Brand Authority Content पर फोकस करेगा।

Q4. क्या लिंक पर क्लिक की जरूरत पूरी तरह खत्म होगी?
नहीं, Transactional Queries, E-Commerce और Deep Research Topics के लिए लिंक अब भी जरूरी रहेंगे।

Q5. OpenAI इस चुनौती का जवाब कैसे देगा?
OpenAI अपनी GPT सीरीज़ में Real-Time Browsing, Plugins और Personalized AI Agents के फीचर्स जोड़ रहा है ताकि वह Google से अलग बने रह सके।

Leave a Comment

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now